गो-संसद का आयोजन

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Published On : 2018-06-09 07:10:38

गो संवर्धन के लिए गो-संसद का आयोजन 
डाॅ.पुष्पेंद्र दुबे
 
भोपाल। मध्यप्रदेश गो संवर्धन बोर्ड और गोरस आर्गनाइजेशन युनाइटेड गो फेडरेशन के तत्वावधान में भोपाल स्थित शारदा विहार विद्यालय में 4 और 5 जून को राष्ट्रीय गो संगोष्ठी ‘गो-संसद’ का आयोजन किया गया। गो-संसद का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि देश में मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है जहां कामधेनु गो-अभयारण्य बनाया गया है, जहां गौवंश निर्भय होकर विचरण करती हैं। प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे 108 गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। श्री गुप्ता ने कहा कि गोवंश के अवैध परिवहन और कत्ल को रोकने के लिए शासन ने सख्त कानून बनाए हैं। प्रदेश में गोचर भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जा रही है। गौचारण की भूमि सुरक्षित रखने के लिए कलेक्टरों को अधिकार दिए गए हैं। श्री गुप्ता ने कहा कि भारत का स्वर्णिम युग गौरक्षा से आरंभ होगा। 
गो-संसद की अध्यक्षता तेलंगाना से पधारे श्री सत्यवीर जी ने की। उन्होंने कहा कि गोवंश की रक्षा के बारे में समग्र दृष्टि से विचार करने की आवश्यकता है। गोमूत्र को लेकर पश्चिम के देशों में अनेक प्रकार के शोध हो रहे हैं। हमारे यहां गोमूत्र चिकित्सा से गंभीर बीमारियों को दूर किया जा रहा है, परंतु उसका डेटा तैयार करने में हम पीछे हैं। गोबर खाद बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। गो आधारित ग्रामोद्योगों को पुनर्जीवित करना आज के समय की मांग है।
मध्यप्रदेश गो सवंधर्न के पूर्व अध्यक्ष श्री मेघराज जैन ने कहा कि पहले बूढ़ी गायों को बचाने की समस्या थी। गोशालाओं का सत्यापन करना कठिन काम था। लेकिन निरंतर प्रयासों के बाद आज स्थिति बदली है। लोगों में गाय का दूध और पंचगव्य से निर्मित उत्पादों की मांग बढ़ी है। जैविक खेती के लिए गोबर खाद का उपयोग बढ़ गया है। इसके बाद भी लोकशिक्षण का विशाल कार्य सामने मौजूद है। युवाओं को गौवंश की वैज्ञानिकता को आमजन तक पहुंचाना चाहिए। गौशालाओं को स्वावलंबी बनाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। मध्यप्रदेश गो संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद गिरि ने अपने प्रास्ताविक में गौ-संसद की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 604 गौशालाएं क्रियाशील हैं। इनमें 98 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं। 26 गौशालाओं में गोमूत्र से औषधियां तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा 312 गौशालाओं में जैविक खेती हेतु गोबर खाद तैयार की जा रही है। इन सभी गोशालाओं में वर्तमान में 1 लाख 53 हजार 883 गौवंश उपलब्ध है। स्वामीजी ने कहा कि गो-अभयारण्य में लगभग 4300 निराश्रित अशक्त गौवंश का पालन किया जा रहा है। इस गोवंश में से मालवी नस्ल के गोवंश के अच्छे गोवंश को छांटकर प्रजनन का कार्य प्रारंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि इसी अभयारण्य में 85 घनमीटर के 3 बायोगैस प्लांट संचालित हैं, जिनसे प्राप्त स्लरी से खाद बनायी जा रही है। स्वामीजी ने कहा कि देश की आर्थिक समृद्धि का मार्ग गोरक्षा से होकर जाता है। इसलिए हमें प्राणपण से इस कार्य में जुटने की आवश्यकता है। 
इस अवसर पर दिल्ली के श्री मधुर जी ने स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि जी को गौ-संसद जैसा अनूठा आयोजन करने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा भेजा गया मानपत्र भेंट किया। 
गौ-संसद में हरियाणा गोसेवा आयोग के अध्यक्ष धानीराम जी, उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री राजीव गुप्ता, मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोड के उपाध्यक्षद्वय सर्वश्री संतोष जोशी, नारायण व्यास, खनिज विकास निगम के श्री शिवकुमार चैबे, सुरेश गुप्ता, शंकरलाल पाटीदार, श्रीनिवास राव, प्रबंधक आर.के.रोकड़े सहित अनेक गणमान्य नागरिक और किसान उपस्थित थे। गौ-संसद में प्रदेश के 51 जिलों में संचालित गौशालाओं के प्रबंधक और उप निदेशक भी मौजूद थे।
गौ-संसद में चार सत्र हुए, जिसमें राष्ट्रीय गोचर विकास, राष्ट्रीय जल प्रबंधन, गोविद्या-गोविज्ञान, गो आधारित ग्रामोद्योग, वृषभ आधारित वैकल्पिक ऊर्जा, लोक शिक्षण, गो-ग्राम संकुल पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। गो-संसद में देश के अनेक प्रान्तों के गोभक्त उपस्थित हुए<span 14px;\"="">।
विद्या भारती द्वारा मार्गदर्शित शारदा विहार विद्यालय भोपाल से लगभग 15 किलोमीटर दूर केरवा डैम रोड पर स्थित है। यह पूर्णतः आवासीय विद्यालय है, जहां 32 गांवों के 753 छात्र अध्ययन करते हैं। परिसर में खेल-कूद की परंपरागत और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी आयु वर्ग के विद्यार्थियों को मलखंभ का प्रशिक्षण दिया जाता है। विद्यालय के परिसर में ही गीर नस्ल की गौशाला संचांलित होती है। यहां के दूध की खपत छात्रावास में हो जाती है, इसलिए दूध का विक्रय नहीं किया जाता है। गौशाला के पास में ही 45 घनमीटर के दो बायोगैस संयंत्र हैं, जिसका उपयोग भोजन बनाने में किया जाता है। इससे बिजली भी बनायी जा रही है। इसी परिसर में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम के अंतर्गत शारदा विहार (प्राइवेट) आईटीआई भी संचालित किया जा रहा है। जिसमें डेयरी साइंस, मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट्स, हाॅर्टीकल्चर, फ्लोरीकल्चर, मिट्टी परीक्षण, कृषि उत्पाद प्रोसेसिंग जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं।